देहरादून। प्रदेश के आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने विधान सभा स्थित कार्यालय कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर आयुष विभाग के विभिन्न कार्यों और योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में चिकित्सा अधिकारियों की सेवा संबंधी समस्याओं, विभागीय ढांचे के पुनर्गठन, आयुष चिकित्सालयों के निर्माण और मानव संसाधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्ष 2013 और 2015 में नियुक्त एवं विनियमित चिकित्सा अधिकारियों में से जो अधिकारी एसीपी (ACP) के लिए पात्र हैं, उन्हें एक माह के भीतर एसीपी का लाभ उपलब्ध कराया जाए। जिन चिकित्सा अधिकारियों के आवश्यक दस्तावेज अभी प्राप्त नहीं हुए हैं, उनसे दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पत्राचार करने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने बताया कि चिकित्सा अधिकारियों को डीएसीपी (DACP) का लाभ दिए जाने संबंधी प्रकरण मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार वित्त विभाग को भेज दिया गया है। वहीं, विभागीय ढांचे के पुनर्गठन संबंधी प्रस्ताव भी सदस्य सचिव, विभागीय संरचना एवं वेतन विसंगति को भेजा गया है, जिस पर कार्रवाई जारी है।
बैठक में योग अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने बताया कि योग अनुदेशकों का मानदेय 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति घंटा किए जाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया गया है।
मंत्री ने वर्ष 2024 बैच के उन चिकित्सा अधिकारियों के शीघ्र स्थायीकरण के निर्देश भी दिए, जिनका परिवीक्षा काल मार्च 2026 में पूरा हो चुका है। इसके साथ ही पंचकर्म सहायकों की नियुक्ति तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायकों की तैनाती की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया।
आयुष चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों पर जोर
पीपलकोटी स्थित जर्जर आयुर्वेद चिकित्सालय भवन को अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए नया भवन किराये पर लेने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं हरिद्वार के रुड़की में ऐलोपैथिक विभाग के नए भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। पुराने ऐलोपैथिक भवन को आयुष विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है। भवन मिलने के बाद यहां 15 बेड का आयुष चिकित्सालय संचालित किए जाने से स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में दो आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की दिशा में भी अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके लिए संबंधित जिलाधिकारियों से भूमि की उपलब्धता को लेकर पत्राचार किया गया है। जिन जिलों में उपयुक्त भूमि उपलब्ध होगी, वहां मेडिकल कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
हरिद्वार जिले के पिरान कलियर क्षेत्र में प्रस्तावित यूनानी चिकित्सालय का मामला भी बैठक में सामने आया। चिह्नित भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग की जद में आने के कारण भवन निर्माण प्रभावित है। चिकित्सालय के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के संबंध में क्षेत्रीय विधायक और जिलाधिकारी से पत्राचार किया गया है।
नए पदों और मानदेय पुनरीक्षण पर भी कार्रवाई
मंत्री ने आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाओं तथा होम्योपैथिक फार्मेसी अधिकारियों के नए पदों के सृजन संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके अलावा चिकित्सक सामुदायिक स्वास्थ्य (एमओसीएच) के मानदेय के पुनरीक्षण के लिए भी पत्रावली आगे बढ़ाने को कहा गया।
आयुर्वेद निदेशालय के निर्माण एवं विस्तारीकरण को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। भवन विस्तार के लिए 2,000 वर्गमीटर भूमि आवंटित किए जाने हेतु महानिदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग को पत्र भेजा गया है। वहीं, हरिद्वार स्थित आयुर्वेद फार्मेसी में औद्योगिक शेड के निर्माण एवं विस्तार के लिए सिडकुल क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराने को लेकर सिडकुल के प्रबंध निदेशक को निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग की सचिव रजंना राजगुरु, अपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे, संयुक्त सचिव महावीर सिंह, निदेशक आरपी सिंह समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


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